रायगढ़। छत्तीसगढ़ में इस साल गर्मी ने समय से पहले ही ‘विस्फोटक’ रूप अख्तियार कर लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों का तापमान 35°C की ‘लक्ष्मण रेखा’ लांघ चुका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही रफ़्तार बनी रही, तो मार्च के अंत तक पारा 40°C के पार पहुँच जाएगा। राजधानी रायपुर की कंक्रीट वाली गर्मी और औद्योगिक नगरी रायगढ़ की ‘भट्टी’ ने आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। तू ही जांजगीर चांपा हमेशा की तरह सबसे गर्म बना हुआ है। मौसम विभाग द्वारा अनुमान लगाया जा रहा है कि अप्रैल से ग्रीष्म ऋतु अपने प्रचंड रूप में रहेगी।
रायपुर का हाल: ‘सूखी गर्मी’ और दिन-रात का बड़ा अंतर
छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर में मौसम की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। आसमान पूरी तरह साफ और शुष्क होने के कारण सीधी धूप शरीर को झुलसा रही है। हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) महज 15% से 35% के बीच सिमट गई है, जिससे ‘चिपचिपी गर्मी’ के बजाय ‘सूखी गर्मी’ का अनुभव हो रहा है। हालाँकि, राहत की बात यह है कि रात का न्यूनतम तापमान अभी भी 18°C से 23°C के बीच बना हुआ है, जिससे रातें थोड़ी सुखद हैं, लेकिन दोपहर का ताप अब असहनीय हो चला है।
उद्योगों की ‘भट्टी’ में झुलसता रायगढ़ का जनजीवन
राजधानी रायपुर जहाँ ‘कंक्रीट की गर्मी’ झेल रही है, वहीं रायगढ़ में स्थिति और भी भयावह है। यहाँ की गर्मी कुदरती कम और ‘इंडस्ट्रियल’ ज्यादा है। शहर के 10 किमी के दायरे में स्थित सैकड़ों प्लांटों की चिमनियों से निकलने वाला गर्म धुआं और ‘राखड़’ (Fly Ash) ने शहर को गैस चैंबर बना दिया है। रायगढ़ में 13 से अधिक कोयला खदानें और 12 पावर प्लांट हैं जिनके नजदीक रहने वाले ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। कूलर और पंखे अब केवल गर्म हवा फेंक रहे हैं। मध्यम वर्ग के लोग, जिनके पास एसी लगाने की क्षमता नहीं है, उनके लिए रायगढ़ की यह गर्मी किसी सजा से कम नहीं है। फिलहाल मार्च में रात के समय थोड़ी राहत रहती है, लेकिन आने वाले 20 से 22 दिन बाद रात की गर्मी भी अपने चरम पर होगी।
वनांचल पर कोल माइन्स का साया: गायब हो रहे गौरैया और बगले
रायगढ़ जिले में कभी अपनी हरियाली के लिए मशहूर लैलूंगा, तमनार और धरमजयगढ़ जैसे इलाके अब कोल माइन्स के विस्तार की भेंट चढ़ रहे हैं। बढ़ते कोल माइन्स के कारण यहाँ का ‘इकोसिस्टम’ प्रभावित हो रहा है। तमनार इलाका तो लगभग बर्बाद होने की कगार पर है। हालांकि यहाँ के जंगल अब भी तापमान को कुछ हद तक थामे हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जिस रफ़्तार से कोयला खदानें और कारखाने यहां पाँव पसार रही हैं, आशंका है कि आने वाले दशक में ये वनांचल पूरी तरह कोयले की कालिख में डूब जाएंगे और यहाँ की गर्मी सहनशक्ति के बाहर होगी। फिर ना तो फसल अच्छे से होगी ना इंसान अच्छे से रह पाएंगे और मवेशियों का जीवन तो वैसे भी यहां बदतर है। लैलूंगा के जवाफूल के चावल की खेती भी अब पिछले साल के मुकाबले कम पाई गई जिसका सबसे बड़ा कारण उद्योगों की निकलने वाले धुएं और राखड़ से फसल प्रभावित हुई है।
लैलूंगा के किसान आदित्य बाजपेई ने भावुक होते हुए बताया – “जब हम रायगढ़ से लैलूंगा आते थे, तो रास्ते में इतने तालाब और डभरी पड़ते थे जहाँ गाय-भैंस पानी में डूबे रहते थे और बगुले मछलियां पकड़ते थे। अब न वो तालाब भरे मिलते हैं, न बगुले। घरों में आने वाली गौरैया और कौवे तक अब गायब हो चुके हैं। प्लांटों की कालिख ने सब कुछ खत्म कर दिया है।”
चांपा का रिकॉर्ड और राहत की उम्मीद
फिलहाल जांजगीर-चांपा प्रदेश का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण इसकी कर्क रेखा से नजदीकी और महानदी बेसिन की स्थिति है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राहत की खबर केवल इतनी है कि एक ट्रफ लाइन के प्रभाव से अगले कुछ दिनों में हल्की बूंदाबांदी के आसार बन रहे हैं। लेकिन यह राहत क्षणिक होगी, जिसके बाद पारा ऐसा चढ़ेगा कि इंसान, फसल और मवेशी सब सूखने की कगार पर पहुँच जाएंगे।
केलो प्रवाह की प्रो टिप्स
रायगढ़ में रहने के अनुभव के आधार पर हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे खास तरीके, जिससे आप इस भीषण गर्मी में अपनी सेहत को दुरुस्त रख सकते हैं:
- हाइड्रेशन का रखें ध्यान: दिन भर में कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं। ताज़ा छाछ, नीबू पानी या ओआरएस (ORS) का उपयोग करें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बना रहे।
- मास्क है ज़रूरी: औद्योगिक क्षेत्रों और प्लांट के आस-पास रहने वाले लोग मास्क ज़रूर पहनें ताकि ‘फ्लाई ऐश’ और बारीक राखड़ फेफड़ों तक न पहुँचे।
- ट्रेवल में सावधानी: दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। आंखों की सुरक्षा के लिए सनग्लास पहनें और सिर को सूती कपड़े से ढकें।
- देसी नुस्खे: लू से बचने के लिए जेब में प्याज रखकर चलना और छत्तीसगढ़ का पसंदीदा ‘बोरे बासी’ खाना गर्मी में अमृत समान है।
- मटके का पानी: फ्रिज के ठंडे पानी के बजाय मिट्टी की मटकी का पानी पिएं। धूप से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं, कम से कम 15-20 मिनट के रेस्ट के बाद ही गला तर करें।























