- ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book-2026’ के प्रथम संस्करण का किया विमोचन
- स्थानीय लोकतंत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी और सहभागी बनाने पर हुआ मंथन
- बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति पर छत्तीसगढ़ ने दी प्रस्तुति
रायपुर, 16 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16 और 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन का शुभारंभ आज राज्यपाल रमेन डेका ने किया। शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book-2026’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।
स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने पर हुआ विचार-विमर्श
उद्घाटन के बाद सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों से पहुंचे राज्य निर्वाचन आयुक्तों ने स्थानीय लोकतंत्र, विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने के लिए निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों और विषय-विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां भी दीं।
बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की 25 साल की यात्रा पर प्रस्तुति
सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तों ने स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा किया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से ‘राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति’ विषय पर प्रस्तुति दी गई। यह प्रस्तुति छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार की गई और आयोग की सचिव शिखा राजपूत तिवारी ने प्रस्तुत की।
दुर्गम परिस्थितियों के बीच बस्तर में चुनाव कराना बड़ी चुनौती
प्रस्तुति में बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लगातार सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ने का भी उल्लेख किया गया।
मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और केरल ने तकनीक पर दी प्रस्तुतियां
मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरल की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें ‘EVM sharing tracking policy and it’s challenges and EMS SOFTWARE’, ‘Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation’, ‘Digitalising Elections in India’ और ‘Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story’ विषय शामिल रहे।
स्थानीय निर्वाचन पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने साझा किया अध्ययन
सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी, अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन प्रस्तुतीकरण के माध्यम से साझा किया।
ईवीएम की सुरक्षा और तकनीकी नवाचार पर भी चर्चा
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के विषय-विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।






















