- बेतहाशा पानी की खपत, राउरकेला के कारोबारियों ने रायगढ़ के जंगल में खरीदी जमीन
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। नटवरपुर का जमीन घोटाला सामने आने के पहले वहां का स्वरूप पूरी तरह बदलने की तैयारी की जा रही है। घने जंगलों को काटकर अब दूसरा एथेनॉल प्लांट लगाया जाने वाला है। सरकार ने राउरकेला के कारोबारियों को रायगढ़ की आबोहवा दूषित करने की अनुमति दी है। बीआर रिफाइनरी नामक कंपनी यहां 150 केएलडी क्षमता वाला प्लांट लगाने जा रही है। रायगढ़ शहर के आसपास का पर्यावरण तबाह होने वाला है। स्टील और पावर प्लांटों के बाद अब एथेनॉल प्लांटों के लिए रायगढ़ प्रमुख सेंटर बन रहा है। प्रदेश में अब तक 11 एथेनॉल प्लांट लगाने की अनुमति दी गई है।
रायगढ़ जिले में नवदुर्गा फ्यूल्स और मां मंगला इस्पात ने एथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। अब राउरकेला के कारोबारियों ने नटवरपुर में 150 किलो लीटर डेली क्षमता का प्लांट लगाने के लिए एमओयू किया है। नटवरपुर में जंगल के बीच करीब 14 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है। बीआर रिफाइनरी एलएलपी कंपनी का यह प्लांट हजारों टन अनाज और लाखों लीटर पानी की खपत करेगा। प्रदेश का चावल इस प्लांट में खपाया जाएगा।
भूजल का अवैध दोहन भी होगा। एथेनॉल प्लांट से होने वाला प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है। पेट्रोल से मुनाफा बढ़ाने के लिए कीमती अनाज और पानी इस उद्योग को दिया जाएगा। एक लीटर एथेनॉल के लिए 8-12 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। मतलब रोजाना करीब 15 लाख लीटर पानी उपयोग किया जाएगा जिसकी पूर्ति भूजल दोहन से होगी। चावल, मक्का और गन्ने से ही एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है।
कौन है कंपनी का डायरेक्टर
राउरकेला की कंपनी बीआर रिफाइनरी एलएलपी के डायरेक्टर दिलीप साहू, रोहित अग्रवाल, विवेक खेमका, हर्षवर्धन गर्ग और शशांक गर्ग हैं। कंपनी की नींव 2022 में रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक एथेनॉल की डिमांड आते ही कंपनी ने संयंत्र लगाने की योजना बनाई। नटवरपुर में जमीन भी मिल गई।
कोलकाता के मालिकों से खरीदी जमीन
नटवरपुर की जमीनें बेहद आसानी से मिल रही हैं क्योंकि यहां संदेहास्पद रजिस्ट्रियां हुई हैं। बीआर रिफाइनरी के डायरेक्टरों ने खनं 239/1 रकबा 2.6910 हे और 239/2/ख रकबा 2.8330 हे. खरीद ली है। विकास काला, विशाल काला, विनीत काला और संगीता जैन निवासी हावड़ा की जमीन को शशांक गर्ग के नाम पर 2023 में रजिस्ट्री की गई।
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