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पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार! बेटे की गिरफ्तारी बरकरार, हाईकोर्ट जाने को कहा…

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नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। गिरफ्तारी पर रोक की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। इस बीच, चैतन्य बघेल को एक बार फिर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उन्हें 18 अगस्त को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 जुलाई को भिलाई स्थित बघेल निवास पर छापेमारी के बाद चैतन्य को उनके जन्मदिन के दिन ही हिरासत में लिया था।

ईडी का दावा – 16.70 करोड़ की अवैध कमाई, रियल एस्टेट में निवेश

ईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चैतन्य बघेल पर आरोप है कि उन्होंने शराब घोटाले से मिले लगभग 16.70 करोड़ रुपये की अवैध राशि को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया। जांच में सामने आया कि इस काली कमाई का इस्तेमाल नकद भुगतान, बोगस बैंक एंट्रियों और बेनामी लेन-देन के जरिए किया गया। इतना ही नहीं, ईडी का दावा है कि चैतन्य ने रियल एस्टेट कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ साजिश रचकर फर्जी फ्लैट खरीद के माध्यम से करीब 5 करोड़ रुपये की राशि भी प्राप्त की। बैंकिंग रिकॉर्ड इस लेन-देन की पुष्टि करते हैं।

बघेल पर 1000 करोड़ से ज्यादा के घोटाले से जुड़ाव का आरोप

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित घोटाले में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति को खपाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस धनराशि को कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष समेत अन्य सहयोगियों के माध्यम से आगे निवेश किया गया। मनी ट्रेल और अंतिम उपयोग की जांच अब भी जारी है।

कई दिग्गज पहले ही गिरफ्त में

इस घोटाले के सिलसिले में ईडी पहले ही कई बड़े नामों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, आईटीएस अफसर अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री कवासी लखमा शामिल हैं।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बाद अब भूपेश बघेल और उनके परिवार की निगाहें हाईकोर्ट की ओर हैं, जहां वे गिरफ्तारी से राहत पाने की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि, ईडी का रुख कड़ा बना हुआ है और जांच में तेजी लाई जा रही है।

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Editorial

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