- रायगढ़ और जशपुर में भी औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर किसान आर्थिक संकट में।
भाटापारा। पसीने से सींची गई मेहनत जब मंडी में कौड़ियों के दाम बिकने लगे, तो किसान का हौसला टूट जाता है। शनिवार को बलौदाबाजार जिले की भाटापारा सब्जी मंडी से एक ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जहाँ टमाटर की कीमतों में आई भारी गिरावट से आहत एक किसान ने अपनी पूरी उपज मंडी के मुख्य गेट के बाहर सड़क पर बिखेर दी। व्यापारियों द्वारा लगाई गई बेहद कम बोली से नाराज किसान का कहना था कि उसे फसल का दाम 10 रुपये प्रति कैरेट (लगभग 25 किलो) भी नहीं मिल रहा था। यह कीमत इतनी मामूली थी कि इसमें फसल की तुड़ाई और मंडी तक लाने का भाड़ा भी जेब से भरना पड़ रहा था, जिसके विरोध में उसने पूरी गाड़ी खाली कर दी। किसानों का कहना है कि टमाटर की खेती में बीज, खाद, दवाई, मजदूरी और परिवहन में काफी खर्च आता है, लेकिन मंडी में उन्हें लागत का भी दाम नहीं मिल रहा। ऐसे में खेती करना किसानों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। इसी आर्थिक दबाव के कारण अब किसान अपनी फसल को नष्ट करने जैसा कड़ा कदम उठाने पर मजबूर हैं।
सब्जी की खेती छोड़ने को मजबूर होंगे किसान
खेती-किसानी के गणित को समझें तो एक एकड़ में टमाटर उगाने के लिए बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी मिलाकर लगभग 50 से 60 हजार रुपये का निवेश करना पड़ता है। मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए किसानों को अपनी लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा भी वापस मिलना मुश्किल हो गया है। किसानों का दर्द है कि एक तरफ खेती की लागत और परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मंडी में व्यापारियों की बेरुखी के कारण उन्हें अपनी मेहनत का वाजिब दाम तक नहीं मिल रहा।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
इस विकट स्थिति से तंग आकर स्थानीय किसानों ने प्रशासन से सब्जियों के लिए उचित समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है। भाटापारा के किसानों ने शासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सब्जियों के लिए न्यूनतम मूल्य तय नहीं किया गया या क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आने वाले समय में सब्जी की खेती पूरी तरह बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे। किसानों का साफ कहना है कि बिना सरकारी संरक्षण और भंडारण की सुविधा के, सब्जी की खेती अब उनके लिए सिर्फ घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों का साफ कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में कई किसान सब्जी की खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।
रायगढ़ और जशपुर में भी मंदी का असर
भाटापारा की इस घटना का स्थानीय प्रभाव रायगढ़ और जशपुर जिलों में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। रायगढ़ और जशपुर के चिल्लर बाजारों में इन दिनों टमाटर 10 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। बाजार के गणित को देखें तो जब उपभोक्ता को ₹10 किलो में टमाटर मिल रहा है, तब थोक मंडी में किसान को प्रति किलो मुश्किल से ₹1 या ₹2 ही मिल पा रहे होंगे। जशपुर के बगीचा और पत्थलगांव जैसे टमाटर उत्पादक क्षेत्रों के किसान भी इस मंदी से चिंतित हैं, क्योंकि थोक भाव में आई इस गिरावट से उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।
























