छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में लाल उग्रवाद के खिलाफ छिड़ी जंग को मंगलवार, 31 मार्च को एक ऐतिहासिक कामयाबी मिली। शासन की पुनर्वास नीति ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) से प्रभावित होकर 25 माओवादी कैडरों ने अपने हथियार डाल दिए और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 12 महिलाएं भी शामिल हैं। इस सरेंडर की सबसे चौंकाने वाली बात सुरक्षा बलों द्वारा की गई भारी बरामदगी है। पुलिस ने नक्सलियों के कब्जे से कुल 14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें शामिल है:
- नकद: 2.90 करोड़ रुपये।
- सोना: 7.20 किलोग्राम (जिसका बाजार मूल्य लगभग 11.16 करोड़ रुपये है)।
- हथियार: 93 घातक हथियार, जिनमें LMG, AK-47, SLR, और इंसास राइफलें शामिल हैं।
एक बड़ा रिकॉर्ड: 1 जनवरी 2024 से अब तक अकेले बीजापुर जिले में 1003 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ चुके हैं और अब तक कुल 19.43 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। आत्मसमर्पण करने वालों में कुछ ऐसे नाम हैं जो लंबे समय से सुरक्षा बलों की रडार पर थे। इन पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- मंगल कोरसा (उर्फ मोटू) – CYPC
- आकाश (उर्फ फागु उईका) – CYPC
- शंकर मुचाकी – DVCM
- राजू रैयाम और पाले कुरसम – ACM
इनमें से कई कैडर 1997 से 2004 के बीच नक्सली संगठन में भर्ती हुए थे और क्षेत्र में हुई कई बड़ी वारदातों में सक्रिय रहे थे।
परिजनों की मौजूदगी में वापसी
बीजापुर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बस्तर आईजी सुंदरराज पी., सीआरपीएफ डीआईजी बी.एस. नेगी और एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव मौजूद रहे। इस मौके पर सरेंडर करने वाले नक्सलियों के परिवारजन और समाज के बुजुर्ग भी उपस्थित थे, जिससे माहौल काफी भावुक हो गया।पुलिस ने प्रशासन ने अभी भी जंगलों में सक्रिय माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ें। सरकार उनके सुरक्षित भविष्य और पुनर्वास के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान: “ऐतिहासिक दिन”
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 31 मार्च की इस उपलब्धि को राज्य के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा: “छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के नासूर से मुक्त होकर विकास और सुशासन के नए युग में प्रवेश कर रहा है। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व और हमारे जवानों के साहस का परिणाम है।”


























