डेस्क। सितंबर का महीना धान की खेती के लिए बेहद अहम माना जाता है। खेतों में इस समय बालियां निकलने लगी हैं और यही वह दौर है जब किसान भाइयों को अपनी फसल पर खास नजर रखनी चाहिए। जरा सी लापरवाही पूरे सीजन की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
क्यों है सितंबर खास?
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, बालियां निकलने और दाने बनने की प्रक्रिया शुरू होते ही फसल को पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। लेकिन ध्यान रहे – कम पानी फसल को सुखा सकता है और ज्यादा पानी खेत में जलभराव कर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसान भाइयों को चाहिए कि समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि खेत की मिट्टी में नमी बनी रहे।
जलभराव बना सकता है संकट
अगर खेत में ज्यादा पानी रुक गया, तो न केवल पौधे गिर सकते हैं, बल्कि तेज हवा चलने पर बालियां भी टूटकर झड़ सकती हैं। यही कारण है कि सिंचाई हमेशा संतुलित मात्रा में करें और अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकाल दें।
रोग से बचाव भी जरूरी
इस समय कम बारिश और बढ़ी हुई गर्मी की वजह से कई किसान यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे भूरा फुदका (Brown Planthopper) नामक रोग का खतरा बढ़ जाता है। यह कीट धान के पौधे का रस चूसकर उसे कमजोर कर देता है और धीरे-धीरे पौधे को सुखा देता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश की सलाह है कि यदि खेत में भूरा फुदका रोग दिखाई दे तो किसान ब्रूनो नामक दवा का छिड़काव करें। इसके लिए एक एकड़ फसल में 400 लीटर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।
सीधी सलाह :
फसल में नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव से बचें।
सिंचाई शाम को करना ज्यादा लाभकारी है।
रोग दिखाई दे तो तुरंत दवा का छिड़काव करें।


























