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अनावरी ही अलग-अलग, राजस्व विभाग का औसत उत्पादन सही कैसे

रायगढ़। 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी का वादा अब किसानों को छलावा लग रहा है क्योंकि प्रशासन अनावरी को आधार बनाकर सत्यापन करने का दबाव बना रही है। इसमें भी पेंच फंसा है। फसल कटाई प्रयोग में प्रति एकड़ उत्पादन अधिक है लेकिन धान खरीदी के लिए तय की गई अनावरी कम है। कहीं यह अधिक है। जिस अनावरी को आधार बनाकर धान खरीदी की जा रही है, उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार धान का उत्पादन जानने के लिए फसल कटाई सर्वे करवाती है। रैंडमली चयनित खसरा नंबरों पर 5 बाई 5 मतलब 25 वर्ग मीटर में धान काटकर दानों का वजन किया जाता है। इस हिसाब से प्रति एकड़ औसत उत्पादन निकाला जाता है।

प्रत्येक गांव में करीब दो सैम्पल लिए जाते हैं। इस हिसाब से कृषि विभाग और बीमा कंपनी धान का उत्पादन पोर्टल में अपलोड करती हैं। इधर भू-अभिलेख विभाग भी अनावरी निकालता है। वर्तमान में अनावरी के हिसाब से धान का सत्यापन करने और टोकन देने का आदेश दिया गया है। प्रत्येक किसान को उतना ही धान बेचने की पात्रता है जितना उस क्षेत्र के पटवारी ने सत्यापन किया है। दिक्कत यह है कि कृषि विभाग का औसत उत्पादन और समितियों के लिए घोषित अनावरी में अंतर है। कहीं-कहीं तो दोनों में कई क्विंटल का अंतर है। बड़े किसानों को इसी वजह से नुकसान हो रहा है क्योंकि उनमें से ज्यादातर सिंचित भूमि के मालिक हैं। इस वर्ष बारिश भी अच्छी हुई है। धान का उत्पादन बहुत अच्छा है।

पड़िगांव में उत्पादन रिकॉर्डतोड़, अनावरी कम

उदाहरण के लिए महानदी किनारे उपजाऊ भूमि पर बसे पडिग़ांव में फसल कटाई प्रयोग के बाद यहां 23.17 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन का अनुमान है। जबकि समिति में 19.27 क्विंटल की अनावरी तय की गई है। कई समितियों में किसानों के सामने दिक्कत यह है कि 21 क्विंटल के हिसाब से धान खरीदने के बाद भी उनके पास धान बच रहा है। जिसके पास सिंचाई की सुविधा है, उसके पास धान का अंबार लग गया है।