- 28 दिनों में 5 सफल डिलीवरी कर रचा कीर्तिमान, पूरे छत्तीसगढ़ में बन रही प्रेरणा
खरसिया। क्षेत्र में गौसेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहाँ गौसेवक राकेश केशरवानी और उनकी टीम लगातार घायल और असहाय गौवंशों को राहत पहुंचाने में जुटी हुई है। बीते 28 दिनों में टीम ने पांच गंभीर मामलों में सफल डिलीवरी कराकर नवजात बछड़ों को जीवनदान दिया है, जो पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है। गौसेवक राकेश केशरवानी के नेतृत्व में टीम उन गायों की मदद कर रही है, जो सड़क दुर्घटनाओं में बुरी तरह घायल हो चुकी हैं और खड़े होने की स्थिति में भी नहीं हैं।
ऐसे मामलों में कई गायों के हाथ-पैर और कमर तक टूट चुके हैं, बावजूद इसके उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को सुरक्षित निकालने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। राकेश केशरवानी ने जानकारी दी कि अब तक कई जटिल मामलों में या तो ऑपरेशन के माध्यम से या कठिन परिस्थितियों में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हालांकि, अत्यधिक गंभीर रूप से घायल कुछ गायों को बचाया नहीं जा सका, लेकिन उनके नवजात बछड़े सुरक्षित हैं और दूसरी गायों का दूध पीकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
हाल ही में एक ऐसे ही मामले में राकेश केशरवानी ने खुद प्रयास कर गर्भ में मौजूद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे नवजात को नया जीवन मिला, जबकि मां कुछ घंटों बाद चल बसी। यह घटना गौसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को दर्शाती है। राकेश केशरवानी ने बताया कि इस तरह के केस लगातार सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से अपील की है कि गौवंश की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए जाएं और इस तरह की त्रासदियों पर रोक लगाई जाए।
गौरतलब है कि राकेश केशरवानी और उनकी टीम ने गौसेवा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनका यह प्रयास न केवल घायल गौवंशों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है, बल्कि समाज में मानवता और करुणा का संदेश भी दे रहा है। गौसेवा की यह प्रेरणादायक पहल क्षेत्र में एक मिसाल बन गई है, जो यह संदेश देती है कि समर्पण और सेवा भाव से असंभव लगने वाले कार्य भी संभव किए जा सकते हैं।


























