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रायगढ़ : अपनी 32 डिसमिल जमीन खोजने दर-दर भटक रहा कैंसर का मरीज, नहीं पसीज रहा अफसरों का दिल

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  • राजस्व अभिलेखों में जमीन मौजूद लेकिन मौके पर गायब

रायगढ़ (केलो प्रवाह)। राजस्व विभाग के लिए जमीनों की दो जातियां होती हैं, एक अमीर की दूसरी गरीब की। किसी अमीर की जमीन पर कोई समस्या हो तो चुटकियों में मसला हल हो जाता है। वहीं गरीब आदमी की एडिय़ां घिस जाती हैं लेकिन अफसर नहीं सुनते। एक कैंसर पीडि़त बुजुर्ग अपनी 35 डिसमिल जमीन खोजने के लिए चक्कर काट रहा है। पहले जहां उसकी जमीन थी, अब वहां नहीं है। ऐसा बेतुका जवाब यहां के पटवारी, आरआई दे रहे हैं। रायगढ़ जिले में जमीनें भी चलती हैं। आज जमीन रोड किनारे है लेकिन दस साल बाद यह रोड के एक किमी अंदर भी हो सकती है। ऐसा कारनामा एक-दो नहीं कई बार हो चुका है।

बड़े रामपुर में कृष्णलाल थवाईत की भूमि खसरा नंबर 166/6 शामिल खसरा नंबर 167/4, 167/8 कुल रकबा 0.127 हे. स्थित है। उनको कैंसर हो गया है। इलाज में बहुत खर्च हो रहा है। इसलिए जब उन्होंने अपनी जमीन बेचने के लिए सीमांकन करवाया तो पटवारी ने कह दिया कि कृष्णलाल अपनी जमीन पर काबिज नहीं हैं। वे दो साल से जमीन की तलाश कर रहे हैं। हर अफसर के सामने गुहार लगा चुके हैं। राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर दर्ज है। इसका डायवर्सन भी हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि नक्शे के हिसाब से यह भूमि जहां होनी चाहिए, वहां नहीं है। सीमांकन के लिए आवेदन किया गया था।

राजस्व टीम ने मौके पर जाकर नापजोख भी की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आधा दर्जन पटवारी भी जमीन नहीं ढूंढ़ सके। 2025 में हल्का पटवारी ने सीमांकन करने के बाद रायगढ़ तहसीलदार को बताया कि अभिलेख मिलान करने पर आवेदित भूमि का नक्शा बटांकन नहीं होने के कारण कब्जा नहीं पाया गया। जमीन के सारे दस्तावेज होने के बावजूद गरीब भूमिस्वामी को उसका हक नहीं मिल पा रहा है। गोलमोल प्रतिवेदन देकर भूमिस्वामी हक की जमीन को गायब बता दिया गया है।

नक्शा भी किया था अपडेट, फिर डिलीट
इस मामले में राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जनवरी 2025 में तत्कालीन पटवारी ने खनं 166/6 को नक्शे में भी दर्ज किया था। उस समय की नकल भी कृष्णलाल के पास मौजूद है। फिर बाद में अचानक से नक्शे को बदल दिया गया। नए नक्शे में खनं 166/6 गायब है। भूमि मूल खसरा नंबर 166 का ही हिस्सा है तो वहीं होगी। इसकी लोकेशन नहीं बदल सकती, लेकिन सीमांकन टीम हर बार अलग-अलग जवाब देती है।

2010 में मौजूद थी भूमि, फिर कौन ले गया
रायगढ़ जिले में जमीनों की हेराफेरी के कई कांड हैं। यह मामला सबसे अलग है। आवेदित भूमि 166/6 शामिल खनं 167/4, 167/8 कुल रकबा 0.127 हे. का सीमांकन करने के बाद भूमि नहीं खोजी जा सकी। पटवारियों ने बताया कि जमीन वहां नहीं है। वर्ष 2009-10 में गीतादेवी रतेरिया पति दीनदयाल रतेरिया ने अपनी भूमि का सीमांकन करवाया था। उस समय पटवारी ने चौहद्दी बताई थी। उत्तर दिशा में कृष्णलाल थवाईत की जमीन मौजूद थी। इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि जमीन गायब हो गई।

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