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ताइवानी लौकी की खेती से किसान हुआ मालामाल, कम लागत में लाखों की हो रही कमाई, जाने इस किस्म की खासियत

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लौकी की खेती: सब्जियों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं. क्योंकि पारंपरिक खेती से अलग हटकर किसान अब सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसे में   लौकी की खेती से किसान अच्छी आमदनी कमा रहे हैं लौकी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है. यह गोल और लंबी है. इसकी खेती में कम समय में अच्छी पैदावार मिलती है. बाजार में साल भर इसकी मांग बनी रहती है जिस वजह से लौकी की खेती से किसान लखपति बन रहे हैं. यह फसल किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग बन गई है। इस किसान ने ताइवानी किस्म की लौकी की खेती कर उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा हो रहा है. जिसके लिए वह कई सालो से लौकी की खेती करके लाखों रुपए मुनाफा कमा रहे हैं।

बाराबंकी जिले क़े कुतलूपुर गांव के रहने वाले किसान दिलीप कुमार अन्य फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती की जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ है. आज वह करीब 3 बीघे में ताइवानी लौकी की खेती कर रहे हैं इस खेती से लगभग उन्हें एक लाख रुपए तक का मुनाफा एक फशल पर हो रहा है.

लौकी की खेती

इसकी खेती करने वाले किसान दिलीप कुमार ने कहा कि वैसे तो मैं ज्यादातर पारंपरिक खेती करता था. इधर दो-तीन सालों से सब्जियों की खेती कर रहा हूं. जिसमें लौकी इस समय हमारे पास 3 बीघे में लगी हुई जो ताइवानी किस्म है. इसकी डिमांड  अन्य किस्मो के मुकाबले अधिक है. इसकी खेती में लागत की बात करें तो एक बीघे में 10 से 15 हजार रुपये आती है. इसमें बीज डोरी बांस कीटनाशक दवाइयां पानी लेबर आदि का खर्च लगता है और वही मुनाफा करीब एक फसल पर 90 से एक लाख रुपए तक हो जाता है. इसकी खेती हम स्टेचर पर करते हैं. इससे सब्जियो की पैदावार अच्छी होती हैं।

एक सीजन में लाखों रुपये कमाते

इसकी खेती करना बहुत ही आसान है, पहले हम खेत की जुताई की जाती हैं. उसके बाद पूरे खेत में मेड बनाते हैं फिर इस पर मल्चिंग कर 2 से 3 फिट की दूरी  पर लौकी के बीज की बुआई की जाती है. जब पेड़ थोड़ा बड़ा होने लगता है तब पूरे खेत मे बांस और तार का स्टेचर तैयार करते हैं. फिर लौकी के पौधे को डोरी से स्टेचर से बांध दिया जाता है. जिससे लौकी का पौधा स्टेचर पर फैल जाता है. वहीं पौधा लगाने के महज दो महीने में फशल तैयार हो जाती है।

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