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छत्तीसगढ़ का 90 वर्षीय किसान: उम्र को मात देकर आज भी खेतों में जुटा, ग्रामीण बोले – यही है खेतों का ‘किंग’

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पोंड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम घोसरा में रहने वाले 90 वर्षीय किसान राम सिंह आज भी पहले की तरह खेत में सक्रिय हैं। उम्र के इस पड़ाव पर जहां अधिकतर लोग काम से दूरी बना लेते हैं, वहीं राम सिंह हर दिन खेत में उतरकर युवा पीढ़ी को मेहनत और समर्पण का संदेश दे रहे हैं। राम सिंह ने खेती के कठिन दिनों को करीब से जिया है। वे बताते हैं कि पहले न तो खेतों में आधुनिक साधन थे और न ही उपार्जन केंद्रों में सुविधाओं की कोई व्यवस्था। जब फसल अच्छी हो जाती थी, तब उसे बेचने में और भी अधिक परेशानी उठानी पड़ती थी। उपार्जन केंद्रों में लंबी लाइनें लगती थीं, टोकन की व्यवस्था नहीं थी और किसानों को कई-कई दिन वहीं रुककर अपने धान की रखवाली करनी पड़ती थी।

ढाई एकड़ में खेती करने वाले राम सिंह का कहना है कि पहले खाद और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए किसानों को अक्सर साहूकारों के चक्कर काटने पड़ते थे। महंगे ब्याज पर मिलने वाला कर्ज किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा देता था। मौसम भी अक्सर साथ नहीं देता था। कभी बारिश कम होती थी, तो कभी अधिक। खराब मौसम और फसल चौपट होने का दर्द केवल वही किसान समझ सकते हैं जिन्होंने इसे सहा हो। समय के साथ हालात बदलते गए। राम सिंह मानते हैं कि अब खेती पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज हो गई है। सरकार द्वारा किसानों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि, अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि, किसान क्रेडिट कार्ड, खाद और ऋण की आसान व्यवस्था ने किसानों का बोझ कम किया है। अब उपार्जन केंद्रों में पानी, छाया, बैठने और शौचालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहने लगी हैं।

वे बताते हैं कि वर्तमान सरकार द्वारा किसानों का कर्ज माफ किए जाने और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचने से खेती करना आसान हुआ है। खेती न सिर्फ सम्मानजनक बनी है, बल्कि किसानों को आत्मविश्वास भी दिया है कि मेहनत का फल अवश्य मिलता है। 90 वर्ष की आयु में भी राम सिंह का उत्साह कम नहीं हुआ है। हर दिन सुबह खेत में पहुंचकर काम करना उनके लिए आदत से ज्यादा जीवन का हिस्सा है। उनका मानना है कि खेती केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। मेहनत और दृढ़ता से कोई भी काम बड़ा नहीं होता।

राम सिंह की कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। उनका कहना है कि समय भले बदल जाए, लेकिन खेती की मूल भावना, मेहनत और लगन कभी नहीं बदलती। किसान अगर सही सहयोग और सुविधाएं पाएं, तो खेती सम्मानजनक और समृद्ध जीवन का आधार बन सकती है।

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