रायगढ़। अपेक्स बैंक बरमकेला में 18.13 करोड़ गबन के मामले में दो साल बाद मुख्यालय ने कार्रवाई की है। तत्कालीन शाखा प्रबंधक डीआर वाघमारे, लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष कुमार पटेल को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा पांच आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी निकाल दिया गया है। इसके साथ ही मामले की विस्तृत जांच अब ईओडब्ल्यू करेगी, जिसमें निकाली गई राशि का ट्रांजेक्शन भी देखा जाएगा। सारंगढ़ और बरमकेला क्षेत्र की 17 समितियों में अब तक सबसे बड़ा घोटाला पकड़ा गया है। अपेक्स बैंक, सहकारी समिति प्रबंधकों ने मिलीभगत से 18.13 करोड़ के वारे-न्यारे कर लिए। अलग-अलग बैंक एकाउंट से सेंधमारी करके रुपए निकाल लिए गए।
किसानों के नाम पर समिति के खाते से करोड़ों रुपए का गबन कर लिया गया। बरमकेला ब्रांच के पूर्व शाखा प्रबंधक अधिकारी डीआर वाघमारे, मीनाक्षी मांझी लेखाधिकारी और लिपिक आशीष पटेल के अलावा पांच आउटसोर्सिंग कर्मचारियों लिकेश कुमार बैरागी, रमाकांत श्रीवास्तव, अरुण चंद्राकर, खीरदास महंत और बालकृष्ण कर्ष को बर्खास्त कर दिया गया है। अपने निजी बैंक आईडी का दुरुपयोग करते हुए समिति तथा बैंक के राशि का सुनियोजित तरीके से गबन किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला था कि 1 अप्रैल 2024 से 6 नवंबर 2024 तक समिति बड़े नवापारा, बरमकेला, बोंदा, दुलोपाली, लेंध्रा, लोधिया, लुकापारा, साल्हेओना, सरिया, तौसीर, देवगांव, गोबरसिंघा, कालाखूंटा, कंठीपाली,
करनपाली, कुम्हारी एवं पंचधार के केसीसी खातों को नामे कर कुल 887 किसानों के डीएमआर कैश, काइंड खातों को निरंक किया गया है। 9,91,20,877 रुपये को दूसरे खातों में IMPS ट्रांजेक्शन कर नकद आहरण किया गया। बाद में ऑडिट हुआ तो तीन साल का गबन 18.13 करोड़ पहुंच गया। अंतिम जांच प्रतिवेदन में अब इस मामले में सारंगढ़ ब्रांच मैनेजर संजय कुमार साहू और सहायक लेखापाल दीर्घ साख हेमंत कुमार चौहान के विरुद्ध भी अपराध दर्ज कराने का आदेश बरमकेला शाखा प्रबंधक को दिया गया है। मुख्यालय ने दोनों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कर दी है। बरमकेला ब्रांच में डीएमआर खातों से निमय विरुद्ध संदिग्ध और नकद आहरण किया गया। समितियों के केसीसी खातों को अनाधिकृत रूप से नामे कर राशि अंतरण की गई।
अब तक एफआईआर में नहीं जुड़ा नाम
ब्रांच मैनेजर अरविंद शुक्ला की शिकायत पर बरमकेला थाने में पूर्व शाखा प्रबंधक अधिकारी डीआर वाघमारे, मीनाक्षी मांझी लेखाधिकारी और लिपिक आशीष पटेल, आउटसोर्सिंग स्टाफ कम्प्यूटर ऑपरेटर रमाकांत श्रीवास, कम्प्यूटर ऑपरेटर लिकेश बैरागी, गार्ड अरुण चंद्राकर, खीरदास महंत और बालकृष्ण कर्ष के विरुद्ध बीएनएस की धारा 3 (5), 316 (5), 318 (4), 336 (3), 338 और 340 (2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। इसके अलावा सारंगढ़ ब्रांच पूर्व मैनेजर एसके साहू और लेखापाल हेमंत कुमार चौहान के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की जानी है लेकिन बरमकेला पुलिस ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
ईओडब्ल्यू जांच में क्या-क्या निकलेगा?
अपेक्स बैंक मुख्यालय रायपुर में बैठे मठाधीशों के संरक्षण में 18.13 करोड़ का गबन कर लिया गया। गबन की राशि का बंटवारा भी हुआ है जिसका खुलासा आने वाले दिनों में किया जाएगा। एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है, जिसमें मंजू महेन्द्र पांडे उप आयुक्त सहकारिता, व्यासनारायण साहू एआरसीएस सहकारिता रायगढ़ तथा मेसर्स पीयूष पी. जैन एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म, भिलाई को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। ईओडब्ल्यू इस मामले में अब विस्तृत जांच करेगा जिसमें उन सहयोगियों को भी पकड़ा जाएगा, जिन्होंने गबन की रकम में हिस्सा लिया। रायपुर से लेकर रायगढ़ तक कई कर्मचारी-अधिकारी इसमें शामिल हैं। बड़े नावापारा, बोंदा, लोधिया, साल्हेओना, पंचधार और कंठीपाली के प्रबंधक भी रडार में हैं।





















