- खदान आवंटियों के सामने नई परेशानी, खनिज विभाग के अनुमोदित प्लान में पर्यावरण विभाग ने की कमी
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। रेत खदानों को पर्यावरणीय मंजूरी मिल रही है लेकिन नई परेशानी आ गई है। खनिज विभाग ने पर्याप्त उत्पादन के नजरिए से मात्रा का अनुमोदन किया था लेकिन पर्यावरण विभाग ने उसमें 50 प्रश की कटौती कर दी। मतलब जिस खदान से 40 हजार घन मीटर रेत खनन होना था, वहां केवल 20 हजार घन मीटर की मंजूरी दी गई। छग सरकार की रेत नीति देर से लागू हुई। तेजी से नीलामी भी करा ली गई लेकिन पर्यावरण मंजूरी में पेंच फंस गया। रायगढ़ जिले में तीन चरणों में 15 रेत खदानों की नीलामी की गई। बरभौना (खरसिया), बायसी (धरमजयगढ़), कंचनपुर (घरघोड़ा), लेबड़ा (रायगढ़), पुसल्दा (छाल), रायगढ़ तहसील के औराभाठा, सहजपुरी,
धरमजयगढ़ तहसील की जोगड़ा-1, छाल तहसील की रीलो, घरघोड़ा का कारीछापर और खरसिया के दर्रामुड़ा, डूमरपाली रायगढ़, जोगड़ा धरमजयगढ़, सरडामाल रायगढ़ और छिरभौना घरघोड़ा की नीलामी हुई। नवंबर 2025 में नीलामी पूरी होने के बाद सीईसीबी ने बरभौना, बायसी, लेबड़ा, पुसल्दा, औराभाठा, दर्रामुड़ा, सहजपुरी और सरडामाल को पर्यावरण मंजूरी दे दी है। इसमें भी परेशानी आ गई है। रायगढ़ जिले की जरूरत के हिसाब से खनिज विभाग ने माइनिंग प्लान अनुमोदित कर पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए भेजा था। एप्रवूल कमेटी ने इसमें भी बड़ी कटौती कर दी है। प्रत्येक रेत खदान में जितनी मात्रा सालाना उत्पादन का टारगेट रखा गया था, उसे आधा कर दिया गया।
खनिज विभाग ने दो मीटर गहराई तक खनन करने को मंजूरी दी थी तो वहां भी घटाकर एक मीटर कर दिया गया। अब खदान आवंटियों की परेशानी यह है कि उनको नीलामी के समय घोषित लक्ष्य के हिसाब से उत्पादन करने पर ही लाभ होगा, लेकिन उसमें कटौती कर दी गई है। उदाहरण के लिए बरभौना रेतघाट पर 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 48 हजार घन मीटर रेत खनन का अनुमोदन किया गया था। दो मीटर गहरा खनन कर सकते थे। अब सालाना रेत खनन को 24 हजार घन मीटर करते हुए गहराई एक मीटर कर दिया गया।
राजस्व भी मिलेगा आधा, रेत की भी होगी किल्लत
खनिज विभाग ने रेतघाटों की भौतिक स्थिति का आकलन करते हुए प्लान का अनुमोदन किया था। मतलब किस रेत घाट में कितनी रेत जमा होती है, उस अनुपात में उत्पादन मात्रा तय की गई थी। अब इसे आधा कर देने की वजह से खनिज विभाग को राजस्व भी आधा मिलेगा। यही नहीं जिले में मिलने वाली रेत भी कम हो जाएगी। पहले की तरह किल्लत होती रहेगी।
फिर से आएगी परेशानी
खनिज साधन विभाग छग शासन ने प्रत्येक जिले में पर्याप्त रेत उपलब्धता के लिए ज्यादा से ज्यादा रेत घाट मंजूर करने के आदेश दिए थे। रायगढ़ जिले में 15 घाट चिह्नित किए गए थे जो पहले संचालित 39 घाटों की तुलना में आधे भी नहीं हैं। साल भर निर्माण कार्य चलने की वजह से रेत की जरूरत बढ़ चुकी है। उस अनुपात की बराबरी करने के लिए उत्पादन मात्रा का अनुमोदन किया गया था। पर्यावरण विभाग ने खनिज विभाग के अनुमोदित प्लान को नकार दिया और मात्रा को आधा कर दिया। मतलब किल्लत अब भी बरकरार रहेगी।
रेत घाट अनुमोदित मात्रा पर्यावरण मंजूरी
बरभौना 48000 घमी. 24000 घमी.
बायसी 58848 घमी. 29424 घमी.
लेबड़ा 30000 घमी. 15000 घमी.
पुसल्दा 30240 घमी. 15120 घमी.
औराभाठा 60000 घमी. 30000 घमी.
दर्रामुड़ा 42000 घमी. 21000 घमी.
सहसपुरी 60000 घमी. 30000 घमी.
सरडामाल 60000 घमी. 30000 घमी.






















