रायगढ़। धान खरीदी में प्रशासनिक सख्ती का परिणाम है कि किसानों ने धान बेचने के बाद रिक्त पड़ा रकबा सरेंडर किया है। जिले के करीब 40 हजार किसानों से 8000 हे. रकबा समर्पण कराया जा चुका है। अब अंतिम दिनों में भौतिक सत्यापन में सख्ती बढ़ा दी गई है। छोटे किसानों का धान खरीदने के बाद अब केवल बड़े किसान ही बचे हैं। उनको तीन टोकन की पात्रता है। जिले में 83526 किसानों का पंजीयन हुआ है। उनके 1.25 लाख हेक्टेयर रकबे पर धान खरीदा जाना है। अब तक करीब 62200 किसानों से 39.59 लाख क्विं. धान खरीदा जा चुका है। क्रय धान का रकबा करीब 70 हजार हे. है। अभी भी करीब 55 हजार हे. रकबा शेष है। इस बीच प्रशासन की सख्ती ने उन किसानों से रकबा समर्पण करवाया है जिनके पास धान नहीं बचा था लेकिन रकबा रिक्त था।





पहले इसी रिक्त रकबे पर धान की बोगस खरीदी होती थी। अब तक जिले में 39450 किसानों से 7750 हे. रकबा समर्पण कराया जा चुका है। भौतिक सत्यापन के लिए एक एप बनाया गया है। नोडल अधिकारी और पटवारी को टोकनों का सत्यापन करना है। टोकन के लिए आवेदन लेने के साथ ही नोडल की मैपिंग की जाती है। उस उपार्जन केंद्र का नोडल अधिकारी किसान के टोकन का भौतिक सत्यापन कर रहा है और धान के साथ किसान की फोटो भी अपलोड करना भी अनिवार्य है। सत्यापन के दौरान जितना धान मिलेगा, उसकी एंट्री की जा रही है जो संशोधित नहीं की जाएगी। मतलब सत्यापन में नोडल ने जितना धान लिख दिया, उतना ही खरीदा जाएगा। इस वजह से रिक्त रकबे को किसान से समर्पित कराया जा रहा है। जिले में 105 केंद्रों में 7750 हे. रकबा सरेंडर हो चुका है।





इस बार जिला नोडल पर भी दर्ज होगी एफआईआर
सूत्रों के मुताबिक हर साल रायगढ़ जिले में दो-तीन केंद्रों में गबन होता ही है। रिक्त रकबे में फर्जी खरीदी की जाती है। इन्हीं खातों में फर्जी केसीसी लोन भी निकाला जाता है। इस बार खरसिया और लैलूंगा के कुछ उपार्जन केंद्रों ऐसा किए जाने की सूचना मिल रही है। सरकार ने इस बार ज्यादा सख्ती दिखाई है। हर बार प्रबंधक और ऑपरेटर पर ही कार्रवाई होती है। इस बार जिला नोडल अधिकारी पर भी कार्रवाई हो सकती है।





ब्लॉक किसान समर्पित रकबा
खरसिया 7361 816
घरघोड़ा 1657 960
तमनार 3779 2005
धरमजयगढ़ 8813 2080
पुसौर 8506 457
रायगढ़ 5924 733
लैलूंगा 3363 643











