- जिले की 23 समितियों की लिमिट प्रभावित, सामान्य क्रेडिट लिमिट देने के बावजूद बैलेंस निगेटिव
रायगढ़, 5 अगस्त (केलो प्रवाह)। अपेक्स बैंक मुख्यालय की लापरवाही से सहकारी समितियों का ताना-बाना बिगड़ गया है। किसानों को खेती के लिए लोन चाहिए लेकिन साख लिमिट ऋणात्मक होने की वजह से लोन देना संभव नहीं हो रहा है। जिले की 23 समितियों में यह परेशानी हो रही है। खरीफ सीजन में खेती के लिए किसानों को सबसे बड़ी मदद सहकारी समितियों से मिलने वाला लोन ही है। वस्तु और नकद ऋण के जरिए अपेक्स बैंक समितियों को लोन देता है। ऋण लेन-देन करने वाले किसानों के हिसाब से समिति की सामान्य साख सीमा तय की जाती है। समिति के एकाउंट से किसानों को लिमिट के अनुसार कर्ज दिया जाता है। इसकी वसूली भी उसी एकाउंट से की जाती है। अगले साल की लिमिट भी इसी हिसाब से तय की जाती है।
रायगढ़ जिले में 79 समितियां हैं, जिनमें से 23 में किसानों को लोन मिलने में परेशानी हो रही है। इन समितियों में अनियमितता की वजह से करोड़ों का बैलेंस मायनस में दिख रहा है। इस वजह से सामान्य साख सीमा में पूरी लिमिट देने के बावजूद मायनस ही प्रदर्शित हो रहा है। किसानों को खाद वितरण करने पर अपेक्स बैंक की शाखाओं में समायोजन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से किसानों को मुश्किल हो रही है। ऋएाात्मक बैलेंस होने की वजह से लोन बांटे जाने की स्थिति का पता ही नहीं चल रहा है। एक तरह से किसानों को लोन मिलना ही बंद हो गया है। समिति में दो एकाउंट होते हैं, जिनसे ऋण वितरण होता है। एक में प्लस और एक मायनस में होने के भी कई मामले हैं।
सहकारी समितियों में कई वजहों से पुराने लोन का समायोजन नहीं किया गया। यह लोन अब भी समिति पर बरकरार है, जिस पर ब्याज भी लगता जा रहा है। संपूर्ण ऋण की वसूली समितियों में नहीं की जा रही है। ब्याज अनुदान की राशि भी देरी से खातों में जमा होती है, तब तक ब्याज की गणना की जा चुकी होती है। करंट वर्ष का लोन वसूलने के बाद भी ऋणात्मक स्थिति बनी हुई है। अगले कुछ दिनों में समितियों में हंगामा होने की आशंका जताई जा रही है। साख सीमा बढ़ाने का अधिकार अपेक्स बैंक मुख्यालय को ही है।
इन समितियों में है ऋणात्मक बैलेंस
रायगढ़ जिले में 23 समितियों में यह स्थिति अब विकराल रूप ले रही है। ऋणी किसानों को लोन नहीं मिलने की वजह से खेती करने में दिक्कत हो रही है। धनागर, बंगुरसिया, जामगांव, लोइंग, हालाहुली, बरगढ़, तुरेकेला, चपले, बानीपाथर, खडग़ांव, जतरी, तेतला, तिलगी, खम्हरिया, छर्राटांगर, टेंडानवापारा, उरबा, सिसरिंगा, खम्हार, खडग़ांव 180, कापू, राजपुर और लारीपानी में किसानों को लोन मिलने में परेशानी हो रही है।
जरूरतमंद किसानों का नुकसान
दरअसल सहकारी समितियों में बैंक द्वारा अल्पकालीन कृषि ऋण साख सीमा स्वीकृत की जाती है, जिसके हिसाब से लोन बांटा जाता है। इसके पूर्ण आहरण के बाद फिर से पूरक साख सीमा पत्रक स्वीकृति के लिए बैंक की शाखाओं में तैयार किए जाते हैं। यह अनियमितता है। समितियों में पुराने ऋणी सदस्यों से कालातीत ऋण की वसूली के बिना ही लोन बांटने के लिए लिमिट बढ़वाई जा रही है। इसीलिए ऋण असंतुलन और बकाया लोन पर ब्याज बढ़ रहा है। समिति के एकाउंट ऋणात्मक दिख रहे हैं।






















