रायगढ़। जल जीवन मिशन का काम ठप पड़ा है क्योंकि विभाग के पास भुगतान के लिए फंड ही नहीं है। न तो राज्य ने और न ही केंद्र ने राशि जारी की है। तीन महीने से ठेकेदारों को एक रुपया भी भुगतान नहीं किया गया है। रायगढ़ जिले में ही 20 करोड़ रुपयों से अधिक की देनदारी हो चुकी है। रायगढ़ जिले में 919 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत काम किया जाना था। तीन मल्टीविलेज योजनाएं भी हैं जिनके तहत 131 गांवों तक पानी पहुंचाया जाना है। प्रत्येक घर में नल कनेक्शन देने के लिए पाईप लाइन बिछानी थी। साथ ही ओवरहेड टैंक से सबको जोडऩा था। योजना के पूर्ण होने की मियाद आगे बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन कई योजनाएं जल स्रोत नहीं होने के कारण फ्लॉप हो चुकी हैं। बिना स्रोत ढूंढ़े पहले टंकी बना दी गई।





कई गांव ऐसे हैं जहां पाइप लाइन बिछ गई है, लेकिन टंकी का अता-पता नहीं है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ऑनलाईन और ऑफलाईन प्रमाणीकरण किया है। इसमें करीब 240 गांवों को हर घर जल सर्टिफिकेट के योग्य पाया गया। यह उपलब्धि करीब 25 प्रश है। अभी भी करीब 680 गांवों में काम पूरा नहीं हो सका है। इसकी एक वजह ठेकेदारों को भुगतान नहीं होना भी है। रायगढ़ जिले में 20 करोड़ से भी अधिक का भुगतान लंबित है। केंद्र और राज्य सरकार को आधा-आधा फंड देना है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने अपना हिस्सा जारी नहीं किया है। केंद्रांश नहीं मिलने के कारण राज्य सरकार भी अपना हिस्सा नहीं दे रही है। इस वजह से तीन महीनों से फंड ही नहीं मिला है।





मॉनिटरिंग के लिए अपग्रेड कर रहे सिस्टम
बताया जा रहा है कि योजना में फंड देने के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। गांवों में सही जगह का चुनाव नहीं किया गया और न ही गुणवत्तापूर्ण कार्य हुए। केंद्र सरकार ने पिछले साल जिलों में जाकर जांच करने का आदेश दिया था। इसमें मिले फीडबैक के बाद भुगतान प्रक्रिया और मॉनिटरिंग को लेकर बदलाव किए जा रहे हैं। इसलिए भुगतान नहीं किया जा रहा है। भुगतान करने के बाद भी योजनाएं पूरी नहीं हो रही हैं। इसलिए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत नियम बदले जा रहे हैं।















