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डीएमएफ से लैलूंगा में बनेगा 120 सीटर नर्सिंग कॉलेज: लंबे समय बाद खनन प्रभावितों को उनका हक मिलना शुरू

  • अब तक हर साल शहरी क्षेत्रों और सामग्री खरीदी में ही व्यय किए गए करोड़ों रुपए

रायगढ़। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन में रायगढ़ जिले को केंद्र सरकार से करोड़ों रुपए मिलते हैं। प्रतिवर्ष करीब 80 करोड़ रुपए प्राप्त होने का अनुमान है। करीब दस सालों तक मिले 5 अरब रुपयों से खनन प्रभावित क्षेत्रों में संसाधन विकास पर काम ही नहीं किया गया। अब डीएमएफ से लैलूंगा में 120 सीटर नर्सिंग कॉलेज की परिकल्पना की गई है जिसका संचालन पैन आईआईटी एलुमनी करेगा। छग सरकार अब पिछड़े क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए पैन आईआईडी एलुमनी से एमओयू करने का निर्णय लिया है। इस पर औपचारिक मुहर लगनी बाकी है। रायगढ़ जिले में डीएमएफ से ही हर साल करोड़ों रुपए मिल रहे हैं जिसका इस्तेमाल प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में किया ही नहीं गया। केवल सामग्री खरीदी और ट्रेनिंग के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए गए।

तमनार, घरघोड़ा, धरमजयगढ़ और लैलूंगा क्षेत्र में खनन प्रभावितों को कोई खास लाभ नहीं मिला। न उनको अच्छी सडक़ें मिलीं, न अच्छे स्कूल और न अच्छे अस्पताल मिले। प्रदूषण की तो बात ही बेमानी है। लेकिन अब केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक काम प्रारंभ किया गया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने लैलूंगा में 120 सीटर नर्सिंग कॉलेज खोलने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। पुराने आईटीआई बिल्डिंग का जीर्णोद्धार करके उसे नर्सिंग कॉलेज बनाया जाएगा। यहां आसपास की उन लड़कियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा जो नर्सिंग की पढ़ाई करने दूसरे शहरों में जाती हैं। आदिवासी क्षेत्रों की युवतियों को बेहतर सुविधाओं के साथ घर के नजदीक ही रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी। पैन आईआईटी एलुमनी ही इसका संचालन करेगा।

प्लेसमेंट भी होगा

पैन आईआईटी एलुमनी एक ऐसी संस्था है जो पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा पर भी काम करती है। लैलूंगा के इस नर्सिंग कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद युवतियों को वहीं से अस्पतालों में प्लेसमेंट दिया जाएगा। बड़े-बड़े अस्पतालों के साथ पैन आईआईटी का लिंक है। आदिवासी क्षेत्र की युवतियों को अच्छे पैकेज में बड़े अस्पतालों में काम मिलेगा। इससे जो बदलाव आएगा, उसके दूरगामी परिणाम होंगे।

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Editorial

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