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सुप्रीम कोर्ट का आदेश : 60 दिन के अंदर हटाना है नेशनल हाईवे किनारे अतिक्रमण, खड़े वाहनों पर लें एक्शन

Raipur kharsia National Highway
  • सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को दिए आदेश में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और एनएचएआई को दिया आदेश, कई बिंदुओं पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

रायगढ़। नेशनल हाईवे पर खड़े भारी वाहनों और रोड किनारे हुए अतिक्रमण पर अब शायद कोई कार्रवाई हो जाए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बेहद सख्त आदेश दिया है। अब तक रायगढ़ में कई जानें खड़े वाहनों के कारण जा चुकी हैं लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। अब सुको ने चीफ सेक्रेटरी और एनएचएआई को 60 दिन के अंदर कार्रवाई करने को कहा है। 40 दिन गुजर चुके हैं। दरअसल 2-3 नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी व तेलंगाना के रंगारेड्डी में दो दर्दनाक हादसे हुए थे। दोनों हादसों में कुल 34 लोगोंं की मौत हो गई थी। दोनों ही मामलों में यात्री वाहन और ट्रक की टक्कर हुई थी। दोनों हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।

अदालत ने सभी राज्यों और अथॉरिटीज को नोटिस जारी किया था। सीनियर एडवोकेट एएनएस नाडकर्णी को एमीकस क्यूरी नियुक्त किया था। उन्होंने मामले में कई बैठकों और चर्चाओं के बाद कई सुधार करने की रिपोर्ट दी थी। एनएचएआई से भी रिपोर्ट मांगी गई। सभी बिंदुओं पर ध्यान देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं जिनका पालन सभी राज्यों को करना है। सबसे अहम आदेश भारी वाहनों और अतिक्रमण को लेकर है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और अतुल एस चंदूरकर की बेंच ने कहा कि अब कोई भी भारी वाहन नेशनल हाईवे के किनारे पार्क नहीं किए जाएंगे। एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने से पुलिस अलर्ट होगी और समयबद्ध तस्वीरों के जरिए ई-चालान की कार्रवाई की जाए। एनएचएआई, पुलिस, परिवहन विभाग को मिलकर क्रियान्वयन करना है। कलेक्टरों को एक एसओपी बनाकर कार्रवाई करनी है। आदेश के 60 दिन के अंदर इसका पालन करना है।

60 दिन में हटाएं अतिक्रमण

सुको ने अतिक्रमण को लेकर गंभीर आदेश दिया है। प्रत्येक एनएच में एक निरीक्षण टीम बनाई जानी है। अतिक्रमण की पहचान कर उनको सीएनएच एक्ट 2002 की धारा 26 के तहत नोटिस दिया जाना है। एनएचएआई को अपने मॉड्यूल राजमार्गयात्रा को शुरू करना होगा, जिसमें कोई भी अतिक्रमण की शिकायत कर सकेगा। टोल फ्री नंबर 1033 को एक्टिवेट किया जाना है। वर्ष में कम से कम दो बार ड्रोन से एरियल सर्वे करना है। एनएच की सीमा में कोई भी नया या पुराना अवैध निर्माण या अतिक्रमण हो, 60 दिन के अंदर कलेक्टर को इसे तोडऩा होगा। सभी विभागों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने के बाद कम्प्लायंस रिपोर्ट 75 दिनों के अंदर जमा करनी होगी।

प्रशासनिक सुस्ती नहीं चलेगी, मानव जीवन महत्वपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि देश में कुल सडक़ों का दो प्रश नेशनल हाईवेज हैं। लेकिन कुल मौतों में से 30 प्रश मौतें एनएच में हुई हैं। सडक़ों में प्रशासनिक सुस्ती की वजह से जानलेवा हादसों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। समयसीमा इसलिए दी गई है क्योंकि यह विषय बेहद जरूरी है। आदेश की कॉपी सभी राज्यों के मुख्य सचिव, डीजीपी, एनएचआईडीसी को भी भेजी गई है। रोड सेफ्टी कमेटी द्वारा की गई सिफारिशों को अदालत के पटल में रखने का आदेश दिया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

1- कोई भी विभाग या स्थानीय निकाय एनएच के किनारे निर्माण को क्लीयरेंस या लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेगा। 

2- आदेश के 15 दिनों के अंदर डीएम को डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स का गठन करना होगा। यह टीम अतिक्रमण हटाने के लिए काम करेगी। 

3- राज्यों को 60 दिन के अंदर अधिसूचना जारी करनी है जिसमें एनएच के बीच से 40 मीटर के दायरे में भूमि को आवासीय उपयोग और 75 मीटर तक कमर्शियल यूज पर प्रतिबंध होगा।

4- पुलिस और परिवहन विभाग को हाईवे सर्विलांस टीम बनाकर 50 किमी तक पेट्रोलिंग करानी है। इन वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस होनी चाहिए। सभी एटीएम में टीएमससी कैमरा, स्पीड डिटेक्टर्स, मैसेज साइनबोर्ड, इमरजेंसी कॉल बॉक्स लगाने हैं।

5- प्रत्येक नेशनल हाईवे में 75 किमी पर एनएचएआई को एम्बुलेंस और क्रेन तैनात रखनी होगी। ट्रक ले-बाई फेसिलिटी भी बनानी होगी।

6- एनएच में ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल एरिया की पहचान कर 45 दिनों के अंदर प्रकाशित करना होगा। हाई इंटेन्सिटी एलईडी स्पीड इंफोर्समेंट कैमरा लगाना होगा। 4 महीने के अंदर यह लगाना अनिवार्य है।

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