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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण के अनाज का सबसे ज्यादा गबन

राशन दुकानों में बांटा ही नहीं गया चावल,

हितग्राहियों को योजना बंद होने का हवाला देकर दबाया राशन

सत्यापन में सामने आई एक और सच्चाई

रायगढ़। पीडीएस दुकानों में गरीबों के चावल पर डाका डालकर कई लोग करोड़ों में खेलने लगे हैं। 2017 से हो रहे चावल के गबन के अलावा पिछले दो साल में और भी बड़ी गड़बड़ी की गई है। हाल में हुए भौतिक सत्यापन में कई दुकानों में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का चावल भी गायब मिला। कोई भी भूखा न सोए इसके लिए सरकार गरीबों को सस्ता चावल उपलब्ध करवा रही है। कोरोना के दौर में केंद्र सरकार ने गरीबों को 5-5 किलो अतिरिक्त चावल मुफ्त देने का ऐलान किया था। 2017 से बांटे जा रहे चावल की चोरी कर इसे खुले बाजार में बेचा गया। इस चावल को खरीदकर मिलरों ने सिस्टम में दोबारा से खपा दिया। इस पूरी साजिश को देखकर भी खाद्य विभाग मौन था। दरअसल, मिलर लॉबी के दबाव में खाद्य विभाग झुक गया है।

दुकानों में चावल का गबन हर माह होता रहा और आईडी में सब कुछ साफ देखकर भी खाद्य विभाग चुप रहा। हर दुकान में पुराने स्टॉक के हिसाब से अगले महीने भंडारण किया जाता है। जितनी सामग्री बैंलेंस होती है, उतना घटाकर भंडारण करने का नियम है। लेकिन खाद्य विभाग हर महीने बचत स्टॉक होने के बावजूद दुकानों को पूरे भंडारण की अनुमति देता रहा। सत्यापन में यह भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का चावल भी नहीं बांटा गया और बेच दिया गया। उदाहरण के तौर पर एसडीएम कार्यालय से पुसौर के कांदागढ़ की पीडीएस दुकान को नोटिस दिया गया। पूर्व सरपंच, सचिव और विक्रेता को नोटिस दिया गया है। सत्यापन में पता चला कि दुकान से पीएमजीकेवाय मद का 31.66 क्विंटल और एपीएल का 2.5 क्विंटल नहीं बांटा गया था। ऐसा ही कई दुकानों में हुआ है।

केंद्र का चावल मतलब बंदरबांट की खुली छूट

केंद्र सरकार ने जैसे ही 5-5 किलो चावल मुफ्त देने का ऐलान किया, खाद्य विभाग के साथ दुकान विक्रेताओं को मौका मिल गया। पिछले दो साल में ग्रामीण क्षेत्र की कई दुकानों में इस चावल का वितरण ही नहीं किया गया। दरअसल ग्रामीणों को इसकी जानकारी ही नहीं दी गई। खाद्य विभाग के पास शिकायत भी आई लेकिन कार्रवाई को छिपाया गया। बिना वितरण किए पीएमजीकेवाय के चावल का गबन करने के बाद रिकवरी ही नहीं की गई। किसी भी दुकान पर कार्रवाई भी नहीं हुई। अब वह चावल भी बचत दिख रहा है।

क्या कहते हैं चितरंजन

अभी किसी तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। पूर्व में जो भी शिकायतें आई थी, उनमें जांच की गई है : चितरंजन सिंह, खाद्य अधिकारी