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Petrol-Diesel Price : पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आई बड़ी खुशखबरी

Petrol DieselPrice

केलो प्रवाह डेस्क।  दुनिया भर में चल रहे युद्ध के संकट और खाड़ी देशों में बढ़ते भारी तनाव के बीच भारत के आम नागरिकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। अगर आप भी लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों से परेशान हैं, तो आने वाले दिनों में आपकी जेब का बोझ काफी कम होने वाला है। दरअसल, संकट के इस दौर में भारत के सबसे भरोसेमंद और पक्के दोस्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कच्चे तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी रास्ता ढूंढ निकाला है। यूएई एक नई और बेहद महत्वाकांक्षी ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ का निर्माण कर रहा है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को हमेशा के लिए पक्का कर देगी।

क्या है यह नई पाइपलाइन और क्यों है इतनी खास?

इस खास रणनीतिक पाइपलाइन के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद यूएई को कच्चे तेल के निर्यात के लिए ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के खतरनाक और विवादित समुद्री रास्ते पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि ईरान और पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद भी हो जाता है, तो भी यूएई का कच्चा तेल बिना किसी रुकावट के सीधे भारत तक पहुंचता रहेगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत अबूधाबी के पास स्थित मशहूर ‘हाबशान ऑयल एंड गैस फील्ड’ से होगी, जिसे सीधे ‘फुजैरा पोर्ट’ से जोड़ा जा रहा है। फुजैरा, ओमान की खाड़ी में स्थित यूएई का एक ऐसा रणनीतिक बंदरगाह है जहां से तेल भेजने के लिए जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं पड़ती। वहां पहले से एक तेल पाइपलाइन काम कर रही है, लेकिन अब बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए यूएई इसके समानांतर एक और विशाल पाइपलाइन बना रहा है।

युद्ध स्तर पर चल रहा है काम, 2027 तक होगी तैयार

पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए यूएई इस प्रोजेक्ट को सामान्य से 10 गुना तेज रफ्तार से पूरा कर रहा है। यूएई की सरकारी तेल कंपनी के अनुसार, इस दूसरी पाइपलाइन का करीब 50 फीसदी काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो चुका है। अबूधाबी के क्राउन प्रिंस के कड़े शाही आदेश के बाद इस प्रोजेक्ट पर दिन-रात काम चल रहा है। लगभग 380 किलोमीटर लंबी यह नई पाइपलाइन साल 2027 तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई सरकार इस पर 4 से 6 अरब डॉलर (यानी करीब 38 हजार करोड़ से 57 हजार करोड़ रुपये) का भारी निवेश कर रही है।

इस नई पाइपलाइन के शुरू होते ही फुजैरा बंदरगाह के जरिए तेल निर्यात करने की यूएई की क्षमता 18 लाख बैरल से सीधे दोगुनी होकर 36 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाएगी। चूंकि यूएई का कुल वैश्विक निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन है, इसलिए वह अपना पूरा तेल अकेले इसी सुरक्षित रास्ते से भेजने में सक्षम हो जाएगा।

यूएई को नुकसान से बचाएगा और भारत की ताकत बढ़ाएगा

मौजूदा समय में समुद्री नाकेबंदी के कारण यूएई का लगभग 40 फीसदी तेल निर्यात प्रभावित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि इस तनाव के चलते साल 2026 में यूएई की जीडीपी में 2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ सकती है। इसी नुकसान से बचने के लिए यूएई तेजी दिखा रहा है।
यह खबर भारत के लिहाज से एक बड़ा गेमचेंजर है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 11 प्रतिशत कच्चा तेल अकेले यूएई से ही खरीदता है। अभी पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल यूएई दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसके तहत यूएई अब भारत की धरती पर करीब 3 करोड़ बैरल का ‘स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिज़र्व’ (रणनीतिक तेल भंडार) बनाएगा। इस आपातकालीन भंडार को भरने में भी फुजैरा पोर्ट की सप्लाई सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

दूरी घटेगी, टैक्स बचेगा और प्रति बैरल होगी बड़ी बचत

इस नए समुद्री रास्ते से तेल के टैंकर फुजैरा पोर्ट से निकलकर सीधे ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर होते हुए महज 3 से 5 दिनों में भारत के पश्चिमी तट जैसे गुजरात के मुंद्रा, जामनगर या मुंबई पोर्ट पहुंच जाएंगे। पुराने होर्मुज मार्ग से जहां 2,000 से 2,400 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं फुजैरा से यह दूरी घटकर सिर्फ 1,400 से 2,000 किलोमीटर रह जाएगी। इससे भारत के 1 से 2 दिन के कीमती समय की बचत होगी।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस छोटे और सुरक्षित रास्ते के कारण भारत को समुद्री मालभाड़े में बड़ी कमी देखने को मिलेगी और प्रति बैरल करीब 6 से 8 डॉलर की सीधी बचत होगी। इसके अलावा, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में वसूले जा रहे भारी टोल टैक्स से भी भारत को पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। जब कच्चे तेल का टैक्स और मालभाड़ा दोनों कम होंगे, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में पेट्रोल और डीजल के दाम बेहद सस्ते हो जाएंगे।

केलो प्रवाह डेस्क। दुनिया भर में चल रहे युद्ध के संकट और खाड़ी देशों में बढ़ते भारी तनाव के बीच भारत के आम नागरिकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। अगर आप भी लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों से परेशान हैं, तो आने वाले दिनों में आपकी जेब का बोझ काफी कम होने वाला है। दरअसल, संकट के इस दौर में भारत के सबसे भरोसेमंद और पक्के दोस्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कच्चे तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी रास्ता ढूंढ निकाला है। यूएई एक नई और बेहद महत्वाकांक्षी ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ का निर्माण कर रहा है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को हमेशा के लिए पक्का कर देगी।

क्या है यह नई पाइपलाइन और क्यों है इतनी खास?

इस खास रणनीतिक पाइपलाइन के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद यूएई को कच्चे तेल के निर्यात के लिए ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के खतरनाक और विवादित समुद्री रास्ते पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि ईरान और पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद भी हो जाता है, तो भी यूएई का कच्चा तेल बिना किसी रुकावट के सीधे भारत तक पहुंचता रहेगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत अबूधाबी के पास स्थित मशहूर ‘हाबशान ऑयल एंड गैस फील्ड’ से होगी, जिसे सीधे ‘फुजैरा पोर्ट’ से जोड़ा जा रहा है। फुजैरा, ओमान की खाड़ी में स्थित यूएई का एक ऐसा रणनीतिक बंदरगाह है जहां से तेल भेजने के लिए जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं पड़ती। वहां पहले से एक तेल पाइपलाइन काम कर रही है, लेकिन अब बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए यूएई इसके समानांतर एक और विशाल पाइपलाइन बना रहा है।

युद्ध स्तर पर चल रहा है काम, 2027 तक होगी तैयार

पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए यूएई इस प्रोजेक्ट को सामान्य से 10 गुना तेज रफ्तार से पूरा कर रहा है। यूएई की सरकारी तेल कंपनी के अनुसार, इस दूसरी पाइपलाइन का करीब 50 फीसदी काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो चुका है। अबूधाबी के क्राउन प्रिंस के कड़े शाही आदेश के बाद इस प्रोजेक्ट पर दिन-रात काम चल रहा है। लगभग 380 किलोमीटर लंबी यह नई पाइपलाइन साल 2027 तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई सरकार इस पर 4 से 6 अरब डॉलर (यानी करीब 38 हजार करोड़ से 57 हजार करोड़ रुपये) का भारी निवेश कर रही है।

इस नई पाइपलाइन के शुरू होते ही फुजैरा बंदरगाह के जरिए तेल निर्यात करने की यूएई की क्षमता 18 लाख बैरल से सीधे दोगुनी होकर 36 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाएगी। चूंकि यूएई का कुल वैश्विक निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन है, इसलिए वह अपना पूरा तेल अकेले इसी सुरक्षित रास्ते से भेजने में सक्षम हो जाएगा।

यूएई को नुकसान से बचाएगा और भारत की ताकत बढ़ाएगा

मौजूदा समय में समुद्री नाकेबंदी के कारण यूएई का लगभग 40 फीसदी तेल निर्यात प्रभावित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि इस तनाव के चलते साल 2026 में यूएई की जीडीपी में 2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ सकती है। इसी नुकसान से बचने के लिए यूएई तेजी दिखा रहा है। यह खबर भारत के लिहाज से एक बड़ा गेमचेंजर है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 11 प्रतिशत कच्चा तेल अकेले यूएई से ही खरीदता है। अभी पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल यूएई दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसके तहत यूएई अब भारत की धरती पर करीब 3 करोड़ बैरल का ‘स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिज़र्व’ (रणनीतिक तेल भंडार) बनाएगा। इस आपातकालीन भंडार को भरने में भी फुजैरा पोर्ट की सप्लाई सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

दूरी घटेगी, टैक्स बचेगा और प्रति बैरल होगी बड़ी बचत

इस नए समुद्री रास्ते से तेल के टैंकर फुजैरा पोर्ट से निकलकर सीधे ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर होते हुए महज 3 से 5 दिनों में भारत के पश्चिमी तट जैसे गुजरात के मुंद्रा, जामनगर या मुंबई पोर्ट पहुंच जाएंगे। पुराने होर्मुज मार्ग से जहां 2,000 से 2,400 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं फुजैरा से यह दूरी घटकर सिर्फ 1,400 से 2,000 किलोमीटर रह जाएगी। इससे भारत के 1 से 2 दिन के कीमती समय की बचत होगी।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस छोटे और सुरक्षित रास्ते के कारण भारत को समुद्री मालभाड़े में बड़ी कमी देखने को मिलेगी और प्रति बैरल करीब 6 से 8 डॉलर की सीधी बचत होगी। इसके अलावा, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में वसूले जा रहे भारी टोल टैक्स से भी भारत को पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। जब कच्चे तेल का टैक्स और मालभाड़ा दोनों कम होंगे, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में पेट्रोल और डीजल के दाम बेहद सस्ते हो जाएंगे।

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विकास पाण्डेय

न्यूज एडिटर

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय से वर्ष 1988 से निरंतर प्रकाशित हो रहे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' के 'Digital Wing' में News Editor की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। Finance (NBFC) क्षेत्र के 15 वर्षों के अनुभव के बाद इन्होंने 'RIG24 Media Network' से Journalism की शुरुआत की और कार्य के दौरान ही 'BJMC' की Professional Degree प्राप्त की। ​विकास अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के Web News Portal और Social Media Platforms का संचालन एवं संपादन कर रहे हैं। ये विशेष रूप से क्षेत्रीय घटनाक्रम, Exclusive रिपोर्ट्स, सीएम की गतिविधियों और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ Agriculture, Politics, Finance, Infrastructure, Development, Employment, Sports, Career, Current Affairs, सामाजिक, देश-प्रदेश और शासन-प्रशासन से संबंधित कई विषयों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं, जो पाठकों की जरूरत के अनुसार उपयोगी हों।

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